ये पल जो गुज़रा है अभी अभी, ना जाने कोई किधर गया! लम्हा लम्हा यूं कटी जिंदगी, की एक साल और गुज़र गया!

ये पल जो गुज़रा है अभी अभी, ना जाने कोई किधर गया!
लम्हा लम्हा यूं कटी जिंदगी, की एक साल और गुज़र गया!

सफर में अबकी बार, गैर भी मिले अपने भी मिले
उम्मीदें भी बहुत जगी, सपने भी कुछ मिले
फिर दिसम्बर के जाने की, आहटों में सब बिखर गया
लम्हा लम्हा यूं कटी जिंदगी, की एक साल और गुज़र गया!

कुछ यादें हैं, अगले साल भी याद आएँगी!
कुछ बातें हैं, गए वक़्त सी भुला दी जाएँगी!
एक उफनता दरिया सा रहा साल, कोई डूबा कोई तर गया
लम्हा लम्हा यूं कटी जिंदगी, की एक साल और गुज़र गया!

3

Article Categories:
Karma
Likes:
3

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *