दोस्ती अनमोल है |

कैफे कॉफी डे के मालिक सिद्धार्थ के पास धन, दौलत, लक्जरी सब थी।

बहुत बड़ी राजनीतिक पकड़ भी थी।

फेंक-फाक अच्छी थी।

रुतबा था टॉप एलीट क्लास सोसाइटी में।

कर्मचारियों की दुआयें भी थीं क्योंकि वे एक नरम दिल सज्जन मालिक थे

क्या नहीं था?
ईश्वर की कृपा से सब कुछ तो था, जिसका हम स्वप्न देखते हैं उससे भी कहीं ज्यादा।

जो उन पर था उससे ज्यादा कर्जा तो कईयों पर है।
उनके कर्जे का निस्तारण भी संभव था।

फिर क्या कमी थी?

कमी थी उस ऊँचाई पर
एक अदद दोस्त की

कमी थी उस मुकाम पर
एक अदद राजदार की

वह जिससे अपनी दिल की बात कह हल्के हो सकें,
वह जिसके साथ बैठकर ठहाके लगाकर अपना स्ट्रेस भूल सकें, जिसे दौड़कर लिपट सकें, जिसके साथ वो अपना रुतवा छोड़कर एक आम आदमी बन सकें, जिससे वो और वो उनसे तू करके बोल सके, जो पीठ पर धौल लगा सके, जो कह सके “ओये, गोली मार दुनियां को, चल घूमने चलते हैं।”

वह दोस्त,
वह यार,
वह राजदार,
वह हमप्याला
उनके पास नहीं था
और आखिर में
यही मायने कर गया

सारी दुनिया की धन दौलत
एकतरफ।

वो प्यारे साथी एक तरफ।

अगर आपके पास वह दोस्त है, वह यार है तो……

कीमत समझिये उसकी।

वरना सब कुछ होते हुए भी पुल से कूदना ज्यादा सहज लगेगा

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